चीन के खिलाफ चौका मारने का मौका: भारत बन सकता है सप्लाई चेन का पहिया मगर राह में हैं ये 4 बड़ी बाधाएं |

कोरोना महामारी ने चीन की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल किया है। साथ ही बढ़ता कामगारों का वेतन और अमेरिका के साथ कारोबारी तनाव ने भी चीन की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाला है। इसके चलते दुनियाभर की कंपनियां चीन से निकलर दूसरे देशों में फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रही हैं। भारत इसका फायदा उठा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी ने भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन (वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला) का पहिया बनने का बड़ा मौका दिया है। हालांकि, यह इतना आसान भी नहीं है। वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए भारत को कई बड़े बदलाव करने होंगे।

भारत के पास बड़ा बाजार
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के मुकाबले भले ही भारत अभी कई मायनों में पीछे है लेकिन विशाल जनसंख्या और बड़ा बाजार कंपनियों को यहां अपनी फैक्ट्री लागने के लिए आकर्षित कर रहा है। कोरोना जैसी महामारी से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है। ऐसे में कंपनियों को उन बाजार की तलाश है जहां पर मांग बहुत हो। भारत के लिए यह सबसे मजबूत पक्ष है।

चीन पर निर्भर हैं बड़े देश
मौजूदा समय में चीन ने खुद को सप्लाई चेन के केंद्र के तौर पर स्थापित कर रखा है। चीन जरूरी सामानों की सप्लाई सभी बड़े देशों को करता है, जिनमें अमेरिका और भारत भी शामिल हैं। कोविड19 ने पूरी सप्लाई चेन को बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महामारी राष्ट्रों को एक ही राष्ट्र पर इतनी ज्यादा निर्भरता के बारे में फिर से सोचने, कंपनियों को अपना बेस चीन से अन्य देशों में शिफ्ट करने पर मजबूर कर देगी।

ये हैं चार बड़ी बाधाएं
जमीन अधिग्रहण व श्रमिक कानून में सुधार जरूरी: चीन और अमेरिका के बीच 2018 से कारोबारी जंग शुरू है। तब से अब तक सैंकड़ों कंपनियों ने चीन से कारोबार समेट कर दूसरे देशों का रुख किया है लेकिन भारत सिर्फ तीन या चार कंपनियां ही आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां आसानी से फैक्ट्री लगा पाएं इसके लिए जरूरी है जमीन अधिग्रहण की पेचीदगियों को खत्म किया जाए। सी को देखते हाल में कई राज्यों ने इसमें बदलाव किया है।
बिजली और माल ढुलाई की लागत घटे: चीन के मुकाबले भारत में कंपनियों का बिजली बिल का खर्च अधिक है। इसको कम करने की जरूरत है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति हो इसके लिए नीति बनाने की जरूरत है। ऐसा करने से चीन से निकल दूसरे देशों में जाने वाली कंपनियां भारत में अपनी फैक्ट्री लगाएंगी। लाजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई की लागत चीन के मुकाबले भारत में अधिक है। इसको कम करने से कंपनियों की लगात कम होगी।

सड़क और कर सुधार की दरकार: विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ओर से सड़क, पोर्ट, हवाई और रेल नेटवर्क में बड़ा सुधार किया गया है। इससे इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी इसमें और बेहतरी की जरूरत है। ऐसा करने से कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने में मदद मिलेगी और उनकी लागत और समय में बचत होगी।भारत को इस दिशा में और कदम उठाने होंगे।

बिजनेस करने की रैंकिंग में और सुधार: विश्व बैंक द्वारा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जारी सूची में भारत उन 20 देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिसने अधिक सुधार किया है। भारत ने बिजनेस शुरू करना, दिवालियापन का समाधान, सीमा पार व्यापार को बढ़ावा, निर्माण स्वीकृति में बड़ा सुधार किया है। सरकार का लक्ष्य इज ऑफ डुइंग बिजनस के मामले में टॉप 50 में स्थान बनाना है। कई क्षेत्र हैं जिसमें सुधार की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.